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| Wednesday 20 August, 2008 |
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काश तुम्हें जी भर के

काश तुम्हें जी भर के प्यार न कर पाता। आरजुओं के अंगारों का संताप न सह पाता।। हमने राख कुरेदी जब-जब ढेरों कुंदन पाया चंदन में लिपटे सांपों ने इसीलिए डस खाया।। अपनी ही पीड़ा का खुद ही उपचार न कर पाता काश तुम्हें जी भर के प्यार न कर पाता।।
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